Wednesday, 24 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 22

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध : बेलि  : 1 : 22

बेलि  : 1 : 22

नौ  बहियाँ  दश  गोनि , हो रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

नौ  बहियाँ  = नव  नाडिया  ! दश  गोनि  = दश  दिशा  ! हो रमैया राम = हे  राममय  साधु  संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर बेलि  के इस पद में कहते है भाईयों यह  शरीर  नव  नाडी  से   पुरे  शरीर में  चेतना  का  संचार  करता  है  उसिके  चलते पांच  इन्द्रिय दशो  दिशा  से  ग्यान  हासिल  करता  है  और   ग्यान  को  क्या  अच्छा  है  क्या  बुरा  है  इस  का  निर्धारण धर्म से  होता  है  इस  लिये  पाप  धर्म  यानी  अधर्म  विकृती  और  पुन्यधर्म  यानी  सदधर्म  संस्कृती  को  समझ  लो  ! विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म अधर्म  पापधर्म  विकृती  है  तो  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  पुन्यधर्म  सदधर्म  संस्कृती  है  ! विदेशी  वैदिक  ब्राह्मणधर्म   विषमतावादी  और  तुम्हारा शोषण  करता  है  तो  मुलभारतिय  हिन्दुधर्म  समतावादी  कल्याणकारी  है  ! दोनो  धर्म  अलग अलग  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान , 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Tuesday, 23 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 21

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध :  बेलि : 1 : 21

बेलि  : 1 : 21

पाँच  लदनुवाँ  लादि  चले  ,  हो रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

पाँच  = पंच  इन्द्रिय  ! लदनुवाँ  = ग्रहण  करने वाले  , लेने  वाले  ! लादि  चले  = लेते  चले  ! हो रमैया राम = हे  रममय  साधु संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है  भाईयों  शरीर  पाँच  इन्द्रिय  लगातार  नये  नये  इच्छा  मोह  वासना  कामना  लालच  तृष्णा  चाहत अहंकार  घमंड  आदी  के  संपर्क  मे  आते  है  और  उससे  बाधित होते  रहते  है !   वही  लोग इनके  काम  को  परख  कर  लेते  है  जो  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  के  शिल  सदाचार  भाईचारा  समता  ममता  विश्वबंधुत्व  के  धर्ममार्ग  पर  चलकर  इन  पाँच  भटकने  वाले  इन्द्रिय  पर  अंकुश  रख  कर  धर्म  अधर्म  संस्कृती  विकृती  की  पहचान  कर  पाते  है  !  वही  इनके  दूर्गुणो  से   बच  कर  सुखी  रहते  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,  कल्याण ,अखण्ड हिन्दुस्तान,  शिवशृष्टी

Monday, 22 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 20

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध :  बेलि  : 1 : 20

बेलि  : 1 : 20 

लादेउ  बस्तु  अमोल  , हो  रमैया  राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

लादेउ  = भार  उठाना  ! बस्तु  = घर  , पैसा  ,संपत्ती  आदी  ! अमोल  =  महंगी , अनमोल  !  हो रमैया राम = हे  राममय  साधु  संतो ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते है भाईयों  मानव  समाज  ने  अपनी  अलग  सोच  , धर्म  संस्कृती  निर्माण  की  है  यह  पुरी  तरह  शृष्टी  के  अन्य  जीव  जन्तु  प्राणी  से  अलग  है  उसने  बहुत  सारी  वस्तुये  बनाया  उसका  संग्रह  करता है  नई   खोज  नया  वस्तु  भांडार  से उसके  कितने   घर  महल   कोठिया  भर  गई  है  पर  वो  नही  है  जो  उसको  संतुष्ठी सुख और  समाधान  दे  सके  ! लालच  चाहत  इच्छा  तृष्णा  अहंकार  मोह  माया  ने  उसका  घर  पुरी  तरह  भर  दिया  है  ऊचनीच  भेदाभेद विषमता शोषण  पुंजीवाद  वसाहतवाद मिलकियत  ने  उसके  भीतर  की  मानवता  को  खत्म  कर  दानव  बना  दिया  है  अधर्म  और  विकृती  से  उसका  जीवन  नर्कमय  हो  गया  है  मानव  जीवान  के  लक्ष  निर्वाण  सुख  को  भूल  कर  वो  पुंजीवादी  , वर्णवादी ,   मनुवादी , ब्राह्मणवादी  तो  बन  गया  है  पर  जैसे  ही  मृत्यू  समीप  आता  है  तभी  अपनी  भूल  पर  रोने  लगता है  तब   क्या  फायदा  ,जब  चिडीया  चुग  hai खेत  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण, अखण्ड  हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Sunday, 21 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 19

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि : 1 : 19

बेलि : 1 : 19

राम नाम धन बनिज कियो , हो रमैया राम ! 

शब्द अर्थ : 

राम नाम = सत्य , राम नाम सत्य है , चेतन तत्व राम , राजा राम ! धन = संपत्ती , दौलत ! बनिज = व्यापार ! कियो = किया ! हो रमैया राम = हे राममय साधु संतो ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है भाईयों राम क्या है ये पहले ठिक से जान लो ! राम चेतन तत्व है ! अजर अमर सार्वभौम सर्वव्यापी परमात्मा शक्ती है जो निरकार निर्गुण है वह हम सब में है और हम सब उसमे है ! उसे कोई माया मोह इच्छा तृष्णा वासना कामना लालच अहंकार नही वह अब केवल तत्व रूप या नियम रूप में है ! दिखता नही पर नियम काम करता है जैसे करोगे वैसे भरोगे ! राम कोई स्त्री पुरूष अवतार मुर्ती नही भले ही तुम किसी इंसान का नाम राम रख लो उसे देवता अवतार देव ईश्वर मानो जैसे मौर्य कुल राजा राम ऊर्फ संप्रती मौर्य और उसके सदगूण मर्यादा पालन आदी के कारण पूज्यनीय मानो उसकी पत्थर मुर्ती , मन्दिर बना कर पूजा करो पर वो निर्गुण निराकार मेरा राम नही ! राम वो है जो मरता नही अजर है अमर है उसे पूजा होम हवन धुप दिप , दान दक्षिणा पंडित ब्राह्मण भट और उसके स्तुती में कहे गये मंत्र आदी से कुछ लेना देना नही ! यह झूठा व्यापार विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म के पोंगा पंडितोने अपने फायदे के लिये फैलाया है ! 

राम किसी मुर्ती अवतार मन्दिर पूजा मंत्र तंत्र में नही वो केवल सत्य में है , धर्म में है शिल मे है सदाचार में है समता न्याय में है ! वर्णवादी , जातिवादी ब्राह्मणवादी वसाहतवादी पुंजीवादी मनुवादी राम नाम का केवल व्यापार कर रहे है भक्ती नही ! ये झूठे लोग है ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण, अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Saturday, 20 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 18

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध  : बेलि  : 1 : 18

बेलि  : 1 : 18

सहज  कियेहु  विश्वास , हो  रमैया  राम  ! 

शब्द  अर्थ  : 

सहज  = सरलता  से , भोलेपन  से   ! कियेहु  = किया  है  ! विश्वास  = भरोसा  ,मान्य  करना !  हो रमैया राम  = हे  राममय  साधु  संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर बेलि  के इस पद में कहते है भाईयों  इतना  भी  भोले  ना  बनो  और  हर  किसी  पर  विश्वास  करो  की  वो  तुम्हे  मूर्ख  बना  कर  तुम्हारा  ही  अहित  करे  जैसे  विदेशी  यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्मी पांडे  पूजारी  तुम्हारे  भोलेपन  का  फायदा  उठाकर  तुम्हे  लूट  रहे  है  और  उल्टे  तुम्हे  ही  शुद्र  निच  अछुत  अस्पृष्य  दोय्यम  दर्जी  के  वर्ण   के  लोग  बता  रहे  है  !  गाय  का  गोबर  मुत्र   तुम्हे  तिर्थ  बताकर  पिला  रहे  है  और  खुद  हलवा  पुरी  पूजा  के  खारिक  बादम  मेवा  मिठाई  घी  खा  रहे  है  !  भाईयों  इतने  भोले  न  रहो  ना  सहज  किसी  पर  अंधविश्वास  करो !  धर्म  और  अधर्म  में  भेद  करो,  मित्र  और  शत्रू  में  भेद  करो  ! देश  के  शत्रू ,  मानवता  के  शत्रू  विदेशी  वैदिक  ब्रहमानो  से  दुर  रहो ,  अपना  मुलभारतिय हिन्दूधर्म का पालन करो ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण,अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Friday, 19 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 17

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध : बेलि  : 1 : 17

बेलि  : 1 : 17

अगम  काटि  गम  कियेहु  , हो  रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

अगम  = असंख्य   ! काटि  = कोटी  , न  कम होने  वाले ,  न  कटने  वाले  ! गम  = दुखद  कृत्य  , पाप  , दुराचार  , अधर्म  !  हो रमैया राम = हे  राममय साधु  संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  चेतन  तत्व  राम  ने   सारासार  विचार , अच्छे  बुरे  की  पहचान ,  धर्म अधर्म  की  परख  करने  के  लिये  प्रग्या  बोध  का अस्त्र  दिया  है , ग्यान  चक्षु  दिये  है ! आप  विवेक  से  इन  ग्यानेद्रिय का  उपयोग  कर  अधर्म  और  धर्म  में  भेद  कर  सकते  हो  और  पाप  कर्म   से  बच  सकते  हो  ! पर  दूर्भाग्य  से   तुम  शिल  सदाचार  सत्य  अहिंसा  समता  ममता  भाईचारा  विश्व  बंधुत्व  वैग्यानिक  दृष्टी  का  धर्म  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  और . सिंधु  हिन्दू  संस्कृती  को  छोड  कर  तुमने  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक ब्राह्मणधर्म  का  वर्णवाद  जातिवाद  ऊचनिच  भेदाभेद  छुवाछुत अस्पृष्यता  शोषण  झूठ  मक्कारी  विकृती  का  मार्ग  ब्राह्मणवादी  वसाहतवादी  पुंजीवादी  मनुवादी धर्म  जो  वास्तविक  अधर्म  और  विकृती  है  उसका  पालन  किये  हो  जीस  कारण  असंख्य  पाप  तुमने  किये  है !  इस  का  परिणाम  तुम्हे  भूगतना  ही  पडेगा  !  पाप  युही  नही  कटते  !  इसलिये  तुम्हे   विदेशी  यूरेशियन वैदिक  ब्राह्मणधर्म जो  अधर्म  है  की  राह  छोड  कर  सत्य  सनातन  आद्य  आदिवाशी  मुलभारतिय  लोकधर्म  की  राह  पर  चलना  होगा  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबिरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठाण  
कल्याण, अखण्ड हिन्दुस्तान,  शिवशृष्टी

Thursday, 18 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 16

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध :  बेलि  : 1 : 16

बेलि  : 1 : 16

हमरे  दोष  का  देहु , हो रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

हमरे  दोष  = हमे  दोष ना  दे  ! का  देहु  = क्यू  देते  हो  ! हो रमैया राम = हे  राममय  साधु संतो  ! 

प्रग्या  बोध  :

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  आप  का  अहित  होता  है  तो  बाद  मे  हमे  दोष  ना  देना  ! हम  तो  आपको  बार  बार  समजा रहे  है  विदेशी  यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म और  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  अलग  अलग  है  ! विदेशी  यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्मी ना  हिन्दू  है  ना  हिन्दुस्तानी  ! वे  देश  , धर्म  और  समाज  के  दुष्मन  है  !  उनका  वैदिक ब्राह्मणधर्म यह  धर्म  नही  अधर्म  है  , उनकी  संस्कृती  कोई  संस्कृती  नही  विकृती  है  !  वे   वेद  भेद  मनुस्मृती  जातिवाद  ऊचनीच  भेदाभेद  छुवाछुत  अस्पृष्यता  विषमता शोषण गुलामी  मानते  है  वे  तुम्हे  अपने  से  निचे  के  वर्ण  जाती  के  मानते  है  !  वो  ब्राह्मण  केवल   एक  वर्ण  सवर्ण  है ,  बाकी  सभी  सभी  मुलभारतिय  और  मुलभारतिय  हिन्दूधर्मी  है  ! समता  विषमता  का  यह  खेल  ये  विचार  कानुन  धर्म  आपके  हित  का नही  ! आपका  शोषण  हो  रहा  है  हम  बता  रहे  है  , ब्राह्मण  अधमी  है  उनका  अधमी  धर्म  पालन  कर  आप  नर्क  मे  जा  रहे  हो  ! हमे  दोष  मत  दो  ! हम  बार  बार  आपको  समजा रहे  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान  , शिवशृष्टी