पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि : 1 : 10
बेलि : 1 : 10
भवन मथेउ भरपूरि , हो रमैया राम !
शब्द अर्थ :
भवन = मकान , कोठी , गृह , बंगला , राजमहल आदी ! मथेउ = मिलाये , लिये , बनाये , मिलकियत , कमाई ! भरपूरि = बहुत अधिक मात्रा में , संख्या में ! हो रमैया राम = हे राममय साधु संतो !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है भाईयों बहुत सारे लोग धन संपत्ती बडे बडे अनेक मकान दुकान कोठी राजमहल आदी बना लेते है ! अधिक अधिक की लालच माया मोह में धर्म करना भूल जाते है , धार्मिक अनुष्ठान पत्थर की मुर्ती की प्राण प्रतिष्ठा और पुजा दान दक्षिणा से पाप नही कटते हम शिल सदाचार का पालन जीवन मे करते की नही हम सत्य बोलते की नही हम किसी को कोई तकलीफ देते की नही यह धर्म आचरण है ! बिना धर्म आचरण से आप धनवान बन जावो अनेक कोठिया मकान और दुकान के मालिक बन जावो पर आप सुखी नही हो सकते मोक्ष निर्वाण का सुख नही पा सकते , बार बार जन्म मृत्यू के फेरे में मोह मायावश यातनाये दुख झेलना ही पडेगा ! इस से बचने का उपाय है सत्य सनातन पुरातन आद्यधर्म मुलभारतिय हिन्दूधर्म का पालन करते हुवे जीवन यापन !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ
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