पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि : 1 : 14
बेलि : 1 : 14
हटलो न मानेहु मोर , हो रमैया राम !
शब्द अर्थ :
हटलो = हटी , हट करने वाला , हटीला , ज़िद्दी ! न = नही ! मानेहु मोर = मेरा कहना , मेरी बात , विचार , शिक्षा ! हो रमैया राम = हे राममय साधु संतो !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है भाईयों यहाँ बहुत सारे लोग है जो अपने हटीले मन के कारण परेशान है और किसी गुरू की बात भी नही मानते है जब की गुरू की बात शिक्षा , विचार उनके हित मे है ! तब भी लोग बडे हटधर्मिता स्वाभव के है ! जैसे बाल हट , राज हट , स्त्री हट बडा ज़िद्दी स्वाभव का होता है और जल्दी किसी से शांत नही होता है वैसे ही लोग अंध श्रद्धा , धर्म अग्यान , बहकावे , झूठा प्रचार आदी के कारण हम जो अच्छा और उनके खुद के भलाई के लिये बताया हुवा शिल सदाचार भाईचारा समता ममता का मुलभारतिय हिन्दूधर्म मानने के बजाय हटधर्मिता के कारण उनका अहित करने वाला विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म मानते है ! ये गलत है !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान
No comments:
Post a Comment