पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि : 1 : 18
बेलि : 1 : 18
सहज कियेहु विश्वास , हो रमैया राम !
शब्द अर्थ :
सहज = सरलता से , भोलेपन से ! कियेहु = किया है ! विश्वास = भरोसा ,मान्य करना ! हो रमैया राम = हे राममय साधु संतो !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है भाईयों इतना भी भोले ना बनो और हर किसी पर विश्वास करो की वो तुम्हे मूर्ख बना कर तुम्हारा ही अहित करे जैसे विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्मी पांडे पूजारी तुम्हारे भोलेपन का फायदा उठाकर तुम्हे लूट रहे है और उल्टे तुम्हे ही शुद्र निच अछुत अस्पृष्य दोय्यम दर्जी के वर्ण के लोग बता रहे है ! गाय का गोबर मुत्र तुम्हे तिर्थ बताकर पिला रहे है और खुद हलवा पुरी पूजा के खारिक बादम मेवा मिठाई घी खा रहे है ! भाईयों इतने भोले न रहो ना सहज किसी पर अंधविश्वास करो ! धर्म और अधर्म में भेद करो, मित्र और शत्रू में भेद करो ! देश के शत्रू , मानवता के शत्रू विदेशी वैदिक ब्रहमानो से दुर रहो , अपना मुलभारतिय हिन्दूधर्म का पालन करो !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान
No comments:
Post a Comment