Monday, 22 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 20

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध :  बेलि  : 1 : 20

बेलि  : 1 : 20 

लादेउ  बस्तु  अमोल  , हो  रमैया  राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

लादेउ  = भार  उठाना  ! बस्तु  = घर  , पैसा  ,संपत्ती  आदी  ! अमोल  =  महंगी , अनमोल  !  हो रमैया राम = हे  राममय  साधु  संतो ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते है भाईयों  मानव  समाज  ने  अपनी  अलग  सोच  , धर्म  संस्कृती  निर्माण  की  है  यह  पुरी  तरह  शृष्टी  के  अन्य  जीव  जन्तु  प्राणी  से  अलग  है  उसने  बहुत  सारी  वस्तुये  बनाया  उसका  संग्रह  करता है  नई   खोज  नया  वस्तु  भांडार  से उसके  कितने   घर  महल   कोठिया  भर  गई  है  पर  वो  नही  है  जो  उसको  संतुष्ठी सुख और  समाधान  दे  सके  ! लालच  चाहत  इच्छा  तृष्णा  अहंकार  मोह  माया  ने  उसका  घर  पुरी  तरह  भर  दिया  है  ऊचनीच  भेदाभेद विषमता शोषण  पुंजीवाद  वसाहतवाद मिलकियत  ने  उसके  भीतर  की  मानवता  को  खत्म  कर  दानव  बना  दिया  है  अधर्म  और  विकृती  से  उसका  जीवन  नर्कमय  हो  गया  है  मानव  जीवान  के  लक्ष  निर्वाण  सुख  को  भूल  कर  वो  पुंजीवादी  , वर्णवादी ,   मनुवादी , ब्राह्मणवादी  तो  बन  गया  है  पर  जैसे  ही  मृत्यू  समीप  आता  है  तभी  अपनी  भूल  पर  रोने  लगता है  तब   क्या  फायदा  ,जब  चिडीया  चुग  hai खेत  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण, अखण्ड  हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

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