Wednesday, 24 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 22

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध : बेलि  : 1 : 22

बेलि  : 1 : 22

नौ  बहियाँ  दश  गोनि , हो रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

नौ  बहियाँ  = नव  नाडिया  ! दश  गोनि  = दश  दिशा  ! हो रमैया राम = हे  राममय  साधु  संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर बेलि  के इस पद में कहते है भाईयों यह  शरीर  नव  नाडी  से   पुरे  शरीर में  चेतना  का  संचार  करता  है  उसिके  चलते पांच  इन्द्रिय दशो  दिशा  से  ग्यान  हासिल  करता  है  और   ग्यान  को  क्या  अच्छा  है  क्या  बुरा  है  इस  का  निर्धारण धर्म से  होता  है  इस  लिये  पाप  धर्म  यानी  अधर्म  विकृती  और  पुन्यधर्म  यानी  सदधर्म  संस्कृती  को  समझ  लो  ! विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म अधर्म  पापधर्म  विकृती  है  तो  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  पुन्यधर्म  सदधर्म  संस्कृती  है  ! विदेशी  वैदिक  ब्राह्मणधर्म   विषमतावादी  और  तुम्हारा शोषण  करता  है  तो  मुलभारतिय  हिन्दुधर्म  समतावादी  कल्याणकारी  है  ! दोनो  धर्म  अलग अलग  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान , 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Tuesday, 23 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 21

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध :  बेलि : 1 : 21

बेलि  : 1 : 21

पाँच  लदनुवाँ  लादि  चले  ,  हो रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

पाँच  = पंच  इन्द्रिय  ! लदनुवाँ  = ग्रहण  करने वाले  , लेने  वाले  ! लादि  चले  = लेते  चले  ! हो रमैया राम = हे  रममय  साधु संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है  भाईयों  शरीर  पाँच  इन्द्रिय  लगातार  नये  नये  इच्छा  मोह  वासना  कामना  लालच  तृष्णा  चाहत अहंकार  घमंड  आदी  के  संपर्क  मे  आते  है  और  उससे  बाधित होते  रहते  है !   वही  लोग इनके  काम  को  परख  कर  लेते  है  जो  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  के  शिल  सदाचार  भाईचारा  समता  ममता  विश्वबंधुत्व  के  धर्ममार्ग  पर  चलकर  इन  पाँच  भटकने  वाले  इन्द्रिय  पर  अंकुश  रख  कर  धर्म  अधर्म  संस्कृती  विकृती  की  पहचान  कर  पाते  है  !  वही  इनके  दूर्गुणो  से   बच  कर  सुखी  रहते  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान,  कल्याण ,अखण्ड हिन्दुस्तान,  शिवशृष्टी

Monday, 22 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 20

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध :  बेलि  : 1 : 20

बेलि  : 1 : 20 

लादेउ  बस्तु  अमोल  , हो  रमैया  राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

लादेउ  = भार  उठाना  ! बस्तु  = घर  , पैसा  ,संपत्ती  आदी  ! अमोल  =  महंगी , अनमोल  !  हो रमैया राम = हे  राममय  साधु  संतो ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते है भाईयों  मानव  समाज  ने  अपनी  अलग  सोच  , धर्म  संस्कृती  निर्माण  की  है  यह  पुरी  तरह  शृष्टी  के  अन्य  जीव  जन्तु  प्राणी  से  अलग  है  उसने  बहुत  सारी  वस्तुये  बनाया  उसका  संग्रह  करता है  नई   खोज  नया  वस्तु  भांडार  से उसके  कितने   घर  महल   कोठिया  भर  गई  है  पर  वो  नही  है  जो  उसको  संतुष्ठी सुख और  समाधान  दे  सके  ! लालच  चाहत  इच्छा  तृष्णा  अहंकार  मोह  माया  ने  उसका  घर  पुरी  तरह  भर  दिया  है  ऊचनीच  भेदाभेद विषमता शोषण  पुंजीवाद  वसाहतवाद मिलकियत  ने  उसके  भीतर  की  मानवता  को  खत्म  कर  दानव  बना  दिया  है  अधर्म  और  विकृती  से  उसका  जीवन  नर्कमय  हो  गया  है  मानव  जीवान  के  लक्ष  निर्वाण  सुख  को  भूल  कर  वो  पुंजीवादी  , वर्णवादी ,   मनुवादी , ब्राह्मणवादी  तो  बन  गया  है  पर  जैसे  ही  मृत्यू  समीप  आता  है  तभी  अपनी  भूल  पर  रोने  लगता है  तब   क्या  फायदा  ,जब  चिडीया  चुग  hai खेत  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण, अखण्ड  हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Sunday, 21 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 19

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि : 1 : 19

बेलि : 1 : 19

राम नाम धन बनिज कियो , हो रमैया राम ! 

शब्द अर्थ : 

राम नाम = सत्य , राम नाम सत्य है , चेतन तत्व राम , राजा राम ! धन = संपत्ती , दौलत ! बनिज = व्यापार ! कियो = किया ! हो रमैया राम = हे राममय साधु संतो ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है भाईयों राम क्या है ये पहले ठिक से जान लो ! राम चेतन तत्व है ! अजर अमर सार्वभौम सर्वव्यापी परमात्मा शक्ती है जो निरकार निर्गुण है वह हम सब में है और हम सब उसमे है ! उसे कोई माया मोह इच्छा तृष्णा वासना कामना लालच अहंकार नही वह अब केवल तत्व रूप या नियम रूप में है ! दिखता नही पर नियम काम करता है जैसे करोगे वैसे भरोगे ! राम कोई स्त्री पुरूष अवतार मुर्ती नही भले ही तुम किसी इंसान का नाम राम रख लो उसे देवता अवतार देव ईश्वर मानो जैसे मौर्य कुल राजा राम ऊर्फ संप्रती मौर्य और उसके सदगूण मर्यादा पालन आदी के कारण पूज्यनीय मानो उसकी पत्थर मुर्ती , मन्दिर बना कर पूजा करो पर वो निर्गुण निराकार मेरा राम नही ! राम वो है जो मरता नही अजर है अमर है उसे पूजा होम हवन धुप दिप , दान दक्षिणा पंडित ब्राह्मण भट और उसके स्तुती में कहे गये मंत्र आदी से कुछ लेना देना नही ! यह झूठा व्यापार विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म के पोंगा पंडितोने अपने फायदे के लिये फैलाया है ! 

राम किसी मुर्ती अवतार मन्दिर पूजा मंत्र तंत्र में नही वो केवल सत्य में है , धर्म में है शिल मे है सदाचार में है समता न्याय में है ! वर्णवादी , जातिवादी ब्राह्मणवादी वसाहतवादी पुंजीवादी मनुवादी राम नाम का केवल व्यापार कर रहे है भक्ती नही ! ये झूठे लोग है ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण, अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Saturday, 20 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 18

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध  : बेलि  : 1 : 18

बेलि  : 1 : 18

सहज  कियेहु  विश्वास , हो  रमैया  राम  ! 

शब्द  अर्थ  : 

सहज  = सरलता  से , भोलेपन  से   ! कियेहु  = किया  है  ! विश्वास  = भरोसा  ,मान्य  करना !  हो रमैया राम  = हे  राममय  साधु  संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर बेलि  के इस पद में कहते है भाईयों  इतना  भी  भोले  ना  बनो  और  हर  किसी  पर  विश्वास  करो  की  वो  तुम्हे  मूर्ख  बना  कर  तुम्हारा  ही  अहित  करे  जैसे  विदेशी  यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्मी पांडे  पूजारी  तुम्हारे  भोलेपन  का  फायदा  उठाकर  तुम्हे  लूट  रहे  है  और  उल्टे  तुम्हे  ही  शुद्र  निच  अछुत  अस्पृष्य  दोय्यम  दर्जी  के  वर्ण   के  लोग  बता  रहे  है  !  गाय  का  गोबर  मुत्र   तुम्हे  तिर्थ  बताकर  पिला  रहे  है  और  खुद  हलवा  पुरी  पूजा  के  खारिक  बादम  मेवा  मिठाई  घी  खा  रहे  है  !  भाईयों  इतने  भोले  न  रहो  ना  सहज  किसी  पर  अंधविश्वास  करो !  धर्म  और  अधर्म  में  भेद  करो,  मित्र  और  शत्रू  में  भेद  करो  ! देश  के  शत्रू ,  मानवता  के  शत्रू  विदेशी  वैदिक  ब्रहमानो  से  दुर  रहो ,  अपना  मुलभारतिय हिन्दूधर्म का पालन करो ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण,अखण्ड हिन्दुस्तान, शिवशृष्टी

Friday, 19 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 17

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध : बेलि  : 1 : 17

बेलि  : 1 : 17

अगम  काटि  गम  कियेहु  , हो  रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

अगम  = असंख्य   ! काटि  = कोटी  , न  कम होने  वाले ,  न  कटने  वाले  ! गम  = दुखद  कृत्य  , पाप  , दुराचार  , अधर्म  !  हो रमैया राम = हे  राममय साधु  संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  चेतन  तत्व  राम  ने   सारासार  विचार , अच्छे  बुरे  की  पहचान ,  धर्म अधर्म  की  परख  करने  के  लिये  प्रग्या  बोध  का अस्त्र  दिया  है , ग्यान  चक्षु  दिये  है ! आप  विवेक  से  इन  ग्यानेद्रिय का  उपयोग  कर  अधर्म  और  धर्म  में  भेद  कर  सकते  हो  और  पाप  कर्म   से  बच  सकते  हो  ! पर  दूर्भाग्य  से   तुम  शिल  सदाचार  सत्य  अहिंसा  समता  ममता  भाईचारा  विश्व  बंधुत्व  वैग्यानिक  दृष्टी  का  धर्म  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  और . सिंधु  हिन्दू  संस्कृती  को  छोड  कर  तुमने  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक ब्राह्मणधर्म  का  वर्णवाद  जातिवाद  ऊचनिच  भेदाभेद  छुवाछुत अस्पृष्यता  शोषण  झूठ  मक्कारी  विकृती  का  मार्ग  ब्राह्मणवादी  वसाहतवादी  पुंजीवादी  मनुवादी धर्म  जो  वास्तविक  अधर्म  और  विकृती  है  उसका  पालन  किये  हो  जीस  कारण  असंख्य  पाप  तुमने  किये  है !  इस  का  परिणाम  तुम्हे  भूगतना  ही  पडेगा  !  पाप  युही  नही  कटते  !  इसलिये  तुम्हे   विदेशी  यूरेशियन वैदिक  ब्राह्मणधर्म जो  अधर्म  है  की  राह  छोड  कर  सत्य  सनातन  आद्य  आदिवाशी  मुलभारतिय  लोकधर्म  की  राह  पर  चलना  होगा  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबिरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठाण  
कल्याण, अखण्ड हिन्दुस्तान,  शिवशृष्टी

Thursday, 18 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 16

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध :  बेलि  : 1 : 16

बेलि  : 1 : 16

हमरे  दोष  का  देहु , हो रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

हमरे  दोष  = हमे  दोष ना  दे  ! का  देहु  = क्यू  देते  हो  ! हो रमैया राम = हे  राममय  साधु संतो  ! 

प्रग्या  बोध  :

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  आप  का  अहित  होता  है  तो  बाद  मे  हमे  दोष  ना  देना  ! हम  तो  आपको  बार  बार  समजा रहे  है  विदेशी  यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म और  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  अलग  अलग  है  ! विदेशी  यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्मी ना  हिन्दू  है  ना  हिन्दुस्तानी  ! वे  देश  , धर्म  और  समाज  के  दुष्मन  है  !  उनका  वैदिक ब्राह्मणधर्म यह  धर्म  नही  अधर्म  है  , उनकी  संस्कृती  कोई  संस्कृती  नही  विकृती  है  !  वे   वेद  भेद  मनुस्मृती  जातिवाद  ऊचनीच  भेदाभेद  छुवाछुत  अस्पृष्यता  विषमता शोषण गुलामी  मानते  है  वे  तुम्हे  अपने  से  निचे  के  वर्ण  जाती  के  मानते  है  !  वो  ब्राह्मण  केवल   एक  वर्ण  सवर्ण  है ,  बाकी  सभी  सभी  मुलभारतिय  और  मुलभारतिय  हिन्दूधर्मी  है  ! समता  विषमता  का  यह  खेल  ये  विचार  कानुन  धर्म  आपके  हित  का नही  ! आपका  शोषण  हो  रहा  है  हम  बता  रहे  है  , ब्राह्मण  अधमी  है  उनका  अधमी  धर्म  पालन  कर  आप  नर्क  मे  जा  रहे  हो  ! हमे  दोष  मत  दो  ! हम  बार  बार  आपको  समजा रहे  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण , अखण्ड हिन्दुस्तान  , शिवशृष्टी

Wednesday, 17 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 15

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध :  बेलि  : 1 : 15

बेलि  : 1 : 15

जस  रे  कियेहु  तस  पायेउ , हो  रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

जस  रे  = जैसे  की  !  कियेहु  = किया  है  , कर्म  किया  ! तस  पायेउ = वैसा  उसका  फल  मिला  ! हो  रमैया राम = हे  राममय साधु संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते है भाईयों  चेतन  तत्व  परमात्मा  राम  का  नियम  है  जैसे  कर्म  करोगे  वैसा  फल  मिलेगा  ! इस  लिये   फल  की  चाहत  या  चिंता  मत  करो  ! धर्म  करो  कुशल  कर्म  करो  ! विदेशी  यूरेशियन  वैदिक ब्राह्मणधर्म के नर्क से  बाहर  आवो  और  अपना  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  का पालन करो !  
मुलभारतिय हिन्दूधर्म  शिल सदाचार भाईचारा समता ममता का धर्म है , मानव  कल्याण  का  धर्म  है  इस  लिये  उसका ही  पालन करोगे  तो  सुखद  फल  मिलना निच्छित है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबिरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान, 
कल्याण ,  अखण्ड हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Tuesday, 16 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 14

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध  : बेलि  : 1 : 14

बेलि  : 1 : 14

हटलो  न  मानेहु  मोर  , हो रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

हटलो = हटी  , हट करने वाला  , हटीला , ज़िद्दी  !  न  = नही  ! मानेहु  मोर  = मेरा  कहना , मेरी बात  , विचार ,  शिक्षा  ! हो रमैया राम = हे  राममय  साधु संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  यहाँ  बहुत  सारे  लोग  है  जो अपने  हटीले  मन  के  कारण  परेशान  है  और  किसी  गुरू  की  बात  भी  नही  मानते है   जब  की  गुरू  की  बात  शिक्षा , विचार  उनके  हित  मे  है  !  तब  भी  लोग  बडे  हटधर्मिता स्वाभव  के  है !   जैसे  बाल  हट ,   राज  हट ,  स्त्री  हट  बडा  ज़िद्दी  स्वाभव  का  होता  है  और  जल्दी  किसी  से  शांत  नही  होता  है  वैसे  ही  लोग  अंध श्रद्धा  , धर्म  अग्यान , बहकावे , झूठा  प्रचार  आदी  के  कारण  हम  जो  अच्छा  और  उनके  खुद  के  भलाई  के  लिये  बताया  हुवा  शिल  सदाचार  भाईचारा  समता  ममता  का मुलभारतिय हिन्दूधर्म मानने  के  बजाय  हटधर्मिता  के  कारण  उनका  अहित  करने  वाला  विदेशी  यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म मानते  है  ! ये  गलत  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण,  अखण्ड हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Monday, 15 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 13

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध  : बेलि : 1 : 13

बेलि  : 1 : 13

तुम  हंसा  मन  मानिक , हो  रमैया  राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

तुम  हंसा  =  हे  शुद्ध मानव ! मन  मानिक  =  मौल्यवान  रत्न  ! हो रमैया राम = हे  रममय  साधु  संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है  भाईयों  तुम  शुद्ध  चेतन  तत्व  राम  हो  , बेदाग हंस जैसे  ऊजले   हो ! मानिक  मोती  जैसे  अनमोल  हो पर  तुम  तुम्हारा  असली  रूप  नही  जानते  हो  अनेक  जन्म  लेकर  माया  मोह  लालच  तृष्णा  के  कारण  तुम  अधर्म  और  पाप  कर  बैठे  हो  पर  अब  भी  समय  है  स्वरूप  को  पहचाने  का  क्यू  की  तुम  इस  समाय  दूर्लभ  मानव जन्म जीवन  में  हो  !  इसी  मानव  जीवन  में  प्रग्या  Bodh यानी  सच्चा  धर्म  ग्यान  संभव  है  ! इस  लिये  गलत  लोगोंकी  संगत  छोडो  , भेदाभेद  का  अधर्म  छोडो  ! समता  ममता भाईचारा  शिल  सदाचार का  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  का  पालन करो  तो  फिर  तुम्हे  तुम्हारा  सही  स्वरूप  हंस  स्वरूप  प्राप्त  होगा  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड  हिन्दुस्तान,  शिवशृष्टी

Sunday, 14 December 2025

Bhagwan ! A poem by Daulatram

#भगवान ! 

बनाये नियम और चले गये भगवान 
निर्वांण अवस्था में सदा के लिये  
अब संसार तुम्हारा और नियम तुम्हारे 
चाहे धर्म करो अधर्म कर्म तुम्हारे !

ज़िन्दा करो मरे मानव को या मारो 
जूडना टुटना नियम मेरा तुम जानो 
मरम्मत कर सकते हो तो करो लेकीन 
मरे को ज़िवित करो पापपुण्य तुम्हारे !

न याद करो मुझको कोई बात नही 
वैसेभी मुझे तुम्हारी कोई जरूरत नही 
मै मस्त हूँ खुष हूँ निर्वाण समाधी में 
पूजा मन्दिर भोग न चाहिये तुम्हारे ! 

पहले भी कह चुका हूँ बन कबीर  
मै तो मालिक हूँ अमिरो का अमिर 
निर्गुण निराकार मै मेरा है स्वरूप 
खुदी से खुदा हूँ न जुदा हूँ तुम्हारे ! 

पापी की सत्ता के भागीदार तुम 
न लड़ो तो हो कायर निकम्मे तुम 
मै क्यू आवू बन अवतार धर्तीपर 
तुम पर ही छोडे है ये काम तुम्हारे !

#दौलतराम

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 12

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध  : बेलि  : 1 : 12 

बेलि  : 1 : 12

बेधिन  पद  निर्बान  , हो रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

बेधिन  = छोडना  , तहस  नहस  करना , त्याग  करना  ! पद  निर्बान  = निर्वांण  पद  , मोक्ष  पद , राम  प्राप्ती  , अंतिम  लक्ष  ! हो  रमैया राम = हे  राममय  साधु  संतो  ! 

प्रग्या  बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में कहते है भाईयों  तुम्हार  लक्ष  निर्वाण  पद  प्राप्त  करना   है  मोक्ष  की  अवस्था  प्राप्त  करना  है  राममय  होकार  राम  होना  है  ! यह  अवस्था  निराकार निर्गुण  चेतन तत्व  राम  की अवस्था  है  जहाँ  न जन्म  मृत्यू  का  फेरा  है  न  काल  चक्र  भव  चक्र  की  उल्जन  है  , न  दुख  है  न  सुख है , न  पाप  है  न  पुण्य  है  ! वहा  केवल   पूर्ण  शांती  है  पूर्ण  सत्य  है  ! एसा  परमपद  का  लक्ष  मानव  जीवान  का  है  उसे  भूल  कर  छोड  कर  त्याग  कर  तुम  निरर्थक  बाते  क्षण  भंगुर  अहंभव  अहंकार  माया  मोह  इच्छा  तृष्णा  के  पिछे  भाग  रहे  हो  ! यह  बेकार  है  धर्म  पकडो  अधर्म  छोडो  ! वैदिक  ब्राह्मंणधर्म  अधर्म  है  विकृती  है  वह  तुम्हारे  लक्ष  मे  बाधा  है  , मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  सही  रास्ता  है  जो  तुम्हे  लक्ष  हासिल  करने  में  सहायता  के  लिये  बनाया  है  चलाना  और  लक्ष  हासिल  करना  तुम्हे ही  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य  कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड  हिन्दुस्तान ,  शिवशृष्टी ,

Saturday, 13 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 11

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध :  बेलि : 1 : 11

बेलि  : 1 : 11

फिरिके  हंसा पाहुन  भयो , हो  रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

फिरिके  = घुम  फिरकर  , जन्म  मृत्यू  के  फेरे  में , बार  बार  का  भव  चक्र !  हंसा  = मानव  ! पाहुन  = मेहमान  ! भयो  = हुवा  ! हो  रमैया  राम  = हे  राममय  साधु  संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है  मानव  जन्म  दूर्लभ  है  अनेक  प्रकार  के  योनी  जन्म  के  बाद  मानव  योनी  से  मानव  जन्म  होता  है  इस  के  लिये  न  जाने  कितने  जन्म  मृत्यू  के  फेरे से  गुजरना  होता  है !  अनेक  सुख  दुख  के  भव  चक्र  से  गुजरना  होता  है  यह  कोई  मामुली  प्रवास  नही  यहाँ  मानव  जन्म  के  अलावा  किसी  अन्य  जन्म  मे  धर्म  अधर्म , पाप  पुन्य  , सदकर्म  दुषकर्म  का  ग्यान  नही  होता  ! प्रग्या  बोध  केवल मानव  जन्म  में  ही  संभव  है  अन्य  जन्म  में  नही  तब   भी  हम  दूर्लभ  मानव  जन्म  लेते  है  तो  मोह  माया  इच्छा  तृष्णा  के  बहकावे  में  आकर  अधर्म  करते  है  और  अधर्म  के  फल  के  कारण  फिर  जन्म मृत्यू  के  फेरे  में  फस  जाते  है  मानवो  ने भी अनेक  अधर्म  अपने   थोडे  फायदे  के  लिये  निर्मांण  किये  है  जैसे  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक ब्राह्मणधर्म जो  पुरा  झूठ  और  विकृती  का पुलिन्दा  है  ! इन  सब  से  बच  कर  मानव  को  मोक्ष  निर्वाण  चेतान  राम  की  कबीर  अवस्था  पाना  मानव  का  जन्म  का  लक्ष  है  जो  इस  लक्ष  को  भूल  जाता  है  और  अधर्म  विकृती  के  मार्ग  पर  चलता  है  उसे  बार  बार  जन्म  मृत्यू  के  भव  चक्र  के  फेरे  में  फस  कर  अनेक  कस्ट  दुख  झेलने  पडते  है  ! मानव  जन्म  यह  मेहमान  इस  बात  को  समझे  तो  जीवन  सार्थक  हो  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड  हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Friday, 12 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 10

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध  : बेलि : 1 : 10

बेलि  : 1 : 10 

भवन  मथेउ भरपूरि , हो  रमैया  राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

भवन = मकान  , कोठी , गृह  , बंगला  , राजमहल आदी ! मथेउ  = मिलाये  , लिये , बनाये , मिलकियत , कमाई  !    भरपूरि  = बहुत  अधिक  मात्रा  में ,  संख्या  में   ! हो  रमैया राम = हे  राममय  साधु  संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद में  कहते  है भाईयों बहुत  सारे  लोग  धन  संपत्ती  बडे  बडे  अनेक  मकान  दुकान  कोठी  राजमहल  आदी  बना लेते  है  !  अधिक   अधिक  की लालच  माया मोह में  धर्म  करना भूल  जाते  है  , धार्मिक  अनुष्ठान  पत्थर  की  मुर्ती  की  प्राण  प्रतिष्ठा  और  पुजा  दान  दक्षिणा  से  पाप  नही  कटते  हम  शिल  सदाचार  का  पालन  जीवन  मे  करते  की  नही  हम  सत्य  बोलते  की  नही  हम  किसी  को  कोई  तकलीफ  देते  की  नही  यह  धर्म  आचरण  है  ! बिना  धर्म  आचरण  से  आप  धनवान  बन  जावो  अनेक  कोठिया  मकान  और  दुकान  के  मालिक  बन  जावो  पर  आप  सुखी  नही  हो  सकते  मोक्ष  निर्वाण  का  सुख  नही  पा  सकते  , बार  बार   जन्म  मृत्यू  के  फेरे  में  मोह  मायावश  यातनाये  दुख  झेलना  ही  पडेगा  ! इस  से  बचने का   उपाय  है  सत्य  सनातन  पुरातन आद्यधर्म मुलभारतिय हिन्दूधर्म का  पालन करते हुवे  जीवन  यापन  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म विश्वपीठ 
कल्याण , अखण्ड  हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Thursday, 11 December 2025

Ichchha Maran ! A poem by Jansenani

#इच्छा_मरण  !

चला  देवू  या  इच्छा  मरण   
त्यांच्या  असंख्य  पापां  साठी
विचारू  झटका  की  लटका 
की  खाण्डोली  छोटी  छोटी   !

त्यांचे  पापच  आहेत  तसे 
अक्षम्य  दुर्बोध  दुराचारी   
अविचारी  अमानविय 
लूटारू  बलातकारी  विषारी  !

अधर्माला  ते  धर्म  म्हणतात 
विकृती  ला  संस्कृती  
बलातकारी  ब्रह्मा  देव  सांगतात 
कुविख्यात  इन्द्रला  कल्याणकारी   !

विचारू  त्यांना  मरणा  पूर्वी 
अंतिम  इच्छा  काय  तुमची 
सोमरस  गोमांस  रंभा  य़ा  ऊर्वशी 
की  होमअग्नि  आहुती  पाठवू  स्वर्गाशी  !

इच्छा  मरण  तर   देणारच 
पूर्वी  ही  विचारले  होते 
छाटले  होते  शिवाने  डोके  ब्रह्माचे 
शिवबाने  भाष्कर  कुलकर्णी   चे  !

सांगा  बेंबित  रामबाण  मारू 
की  मस्तकात  कृष्णक्षेद  करू 
की  पराशुरामचा  सौभममोक्ष  करू  
हत्तीच्या  पाया  देवू  इच्छा  मरण    !

मर्द  असशिल  तर  ये  रणांगणी 
भींमा  कोरेगाव  च्या  मैदानी  
वीर  इच्छा  मरण   देवू   तुम्हाला 
पलू  न  जावू  नको  पलकुट्यावानी  !

#जनसेनानी

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 9

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध :  बेलि  : 1 :  9

बेलि  : 1 : 9

त्रास  मथन  दधि  मथन  कियो , हो  रमैया  राम  ! 

शब्द  अर्थ  : 

त्रास  = परिश्रम   ! मथन  = मंथन  ! दधि   = दही  मथन = दही  को  घूसल  कर  माखन  से  घी  बनाना !  हो रमैया राम = हे  राममय साधु  संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  बहुत  परिश्रम  से  और  विचार  मंथन  से  ही  सफलता  प्राप्त  होती  है  जैसे  दुध  को  बडे  सावधानी  से  गर्म  कर  जमाकर  इंतजार  कर   दही जमाई  जाती  है  और  फिर  उसे  मटके मे  ड़ाल  कर  मेहनत  से  मध  कर  माखन  निकाला जाता  है  और  फिर  उसे  गर्म  कर  घी  बनाई  जाती  है  वैसे ही  इस  जीवन को  समझो  यहाँ  भी  बडे  जतन  और  परिश्रम  से  सत्य  धर्म  के  मथनी  से  मथना पडता   है  तब  कही  राम  मिलता  है निर्वांण  मोक्ष  मिलता  है  !

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ , 
कल्याण, अखण्ड  हिन्दुस्तान,  शिवशृष्टी

Wednesday, 10 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 8

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध : बेलि :  1 : 8

बेलि  : 1 : 8

नैन  भरोगे  दूर  , हो  रमैया  राम  ! 

शब्द  अर्थ  : 

नैन  = आँख , दृष्टी  ! भरोगे  = भरोसे  , विश्वास  ! दूर  = अंतर  ! हो  रमैया  राम = हे  राममय  साधु  संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  अपने  नैन  पर  आँख  पर  दृष्टी  पर  भरोसा  करो  जो  दिखता  है  उसे  सत्य  मानो  न  की  सुनी  सुनाई  बात  ! विदेशी यूरेशियन  ब्राह्मणधर्मी  पांडे  पूजारी  ब्राह्मण  बडे  झूठे  है  उनकी  बातो  में  न आवो  अपने  दृष्टी  और  विचार  करने  की  शक्ती  आकलन  शक्ती  पर  भरोसा  करो  !  सत्य  और  असत्य  की  पहचान  और  परख  करो ! मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  खुद  पर  भरोसा करने  की  सिख  देता  है  झूठे  मक्कार ब्राहमिनो  पर  विश्वास  ना  करो  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड  हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Tuesday, 9 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 7

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध :  बेलि : 1 : 7

बेलि  : 1 : 7

जइहो  बिराने  देश , हो  रमैया  राम  ! 

शब्द  अर्थ  : 

जइहो  = जाते  हो  ! बिराने  देश  = दुसारे , उजड   देश  ! हो रमैया राम = हे  राममय साधु  संतो ! 

प्रग्या  बोध  : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  सुजलाम  सूफलाम  देश  धर्म  छोड  कर  अन्य  बिराने  उजद   देश  में  जाना  मूर्खता  है  वैसे  ही  भाईचार  समता  ममता  शिल  सदाचार  अहिंसा  शांती लोक  कल्याण  का  धर्म  मुलभारतिय  हिन्दुधर्म  छोड  कर  दुसरे  धर्म  जो  जातिवाद  वर्णवाद  ऊचनीच  भेदभाव  अस्पृष्यता  छुवाछुत  शोषण  , गुलामी  लाचारी  गरीबी  का  समर्थक  है  एसे  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक ब्राह्मणधर्म के नर्क  में  क्यू  जाना  चाहते  हो  ? 

धर्मात्मा  कबीर  ने  आपनी  पवित्र  वाणी बीजक मे  साफ  साफ  बताया  है  की  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  और  विदेशी  यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म अलग  अलग  है  ! विदेशी  यूरेशियान  वैदिक ब्राह्मणधर्म  यह  अधर्म  है  संस्कृती  नही  विकृती  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण, अखण्ड  हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Monday, 8 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 6

पवित्र बीजक  : प्रग्या बोध  : बेलि 1 : 6

बेलि  : 1 : 6

काल  बसेरा  बड़ि  दूर  , हो  रमैया  राम  ! 

शब्द  अर्थ  : 

काल  = मृत्यू   ! बसेरा  = रहना  , ठिकाण  ! बड़ि  दूर  = बहुत  दूर  ! हो  रमैया  राम  = हे  राममय  साधु  संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है  भाईयों  बहुत  लोग  गाफिल  है  और  ना  समझ  है , निन्द  मे  है  , खयालो  है  और  उन्हे  लगता  है  की  काल  यानी  मृत्यू  बहुत  दूर  है  कोई  डरने  की  जरूरत  नही  ! आज  आच्छे  कार्य  , धर्म  कार्य , पुण्य  कार्य  करने  की  जरूरत  नही  कल  करेंगे  ! और  एसे  सोचते  सोचते  ही  कब  मृत्यू  आता  है   और  ले  जाता  है  उन्हे  समज मे  ही  नही  आता  और  बुरे  कार्य  में  ऊँहोने  पुरी  ज़िन्दागी  खो  दी  होती  है  ! कबीर  साहेब  कहते   है  भाईयों  साधु  संतो  जागो  मृत्यू  का  कोई  भरोसा  नही  कब  आ  जाये  इस  लिये  हमेशा  अच्छे  कर्म  करो  ताकी अफसोश  ना  रहे  ! 

धर्मविक्रमादित्य  कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म  विश्वपीठ  प्रतिष्ठान कल्याण ,अखण्ड  हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Sunday, 7 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 5

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध  : बेलि  : 1 : 5

बेलि  : 1 : 5

आजु  बसेरा  नियरे , हो  रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

आजु  = अब  ! बसेरा  = रहना  !  नियारे  = नितांत  ! हो  रमैया  राम  = हे  राम  प्रियजन  साधु  संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है  भाईयों  जो  लोग  निरंतर  , नितांत ,   हमेशा  चेतन तत्व  निराकार  निर्गुन  राम  के  पास  या  साथ  रहते  है  उनका  मन  इधर  उधर  माया  मोह  में  भटकता  नही  वे  सदपुरूष  साधु  संत  भाग्यशाली  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म विश्वपीठ 
कल्याण , अखण्ड  हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Saturday, 6 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 4

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि  : 1 : 4

बेलि  : 1 : 4

सोवत  गैल  बिगोय , हो  रमैया  राम  ! 

शब्द  अर्थ  :

सोवत  = सोते  हुवे , निन्द  में  ! गैल  = गया  ! व्यतित  हुवा  !  बिगोय = बिगाड  दिया , खर्च किया ! हो रमैया राम = हे  राममय  संत  साधु  ! 

प्रग्या  बोध ! 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  बतते  है  भाईयों  केवल  निन्द  और  निन्द  मे  दिखे  सपने  में  खुश  ना  हो  !  जागो ! निन्द  में  दिखे  स्वर्ग  और  अन्य  सुख  वास्तविक  नही !  केवल  एसे  निन्द  से  खुश  होने  से  काम  नही  चलेगा !  जीवान  केवल  निन्द  मे  खर्च  करने  के  लिये  नही  मिला  है , आलस  छोडो  और  जीवन  का  उद्देश  समजो  जो  मोक्ष ,  निर्वांण , चेतन राम  के  दर्शन  है  और  वह  पुरूषार्थ  में  है  , नही  की  आलसी  निन्द  और सोते  हुवे  सपनो  में  !  राम  प्रेमियो  जागो  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण, अखण्ड  हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Friday, 5 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli :1 : 3

पवित्र  बीजक  : प्रग्या  बोध  : बेलि  : 1 : 3

बेलि  : 1 : 3

जो  जागल  सो  भागल , हो  रमैया  राम  ! 

शब्द  अर्थ  : 

जागल  = जागृत  ! भागल  = दौडे  गा  आगे  जायेगा  ! हो  रमैया  राम  = राममय  साधु  संत  ! 

प्रग्या  बोध  : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  वही  साधु  संत  संसारी  पुरूष  आगे  जयेगा और  परमात्मा  चेतन   राम  के  प्रथम  दर्शन  करेगा जो  जागृत  रह  कर  धर्म  मार्ग  से  जीवन   यापन  करेगा ! जो  गलत  रास्ते  पर  आँख  मुन्द कर  चलेगा  जैसा  की  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक  ब्राह्मणधर्म  का  विकृत  मार्ग  है  वह  निच्छित  ही  जीवान  चक्र  में  भटकता  रहेगा  !  बार  बार  नर्क  के  दुख  भोगेगा  !  क्यू  की  अधर्म  का  रास्ता  सिधे  नर्क  की  तरफ  ही  जाता  है  ! वैदिक  ब्राह्मणधर्म   नर्क का  द्वार  है  !  तो  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  स्वर्ग  और  कल्याण  निर्वांण  सुख  का  द्वार  है ,  मार्ग  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय  हिन्दूधर्म विश्वपीठ 
कल्याण,  अखण्ड  हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Thursday, 4 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 2

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि : 1 : 2

बेलि : 1 : 2

जागत चोर घर मूसहिं , हो रमैया राम ! 

शब्द अर्थ : 

जागत = जागते रहो , जागृत रहो ! चोर = लूटने वाला ! घर = गृह , मकान , शरीर ! हो रमैया राम = राममय साधु ,भक्त , धार्मिक व्यक्ती ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में बताते है भाईयों गाफिल मत रहो ! यह जीवान जागृती के लिये है ! लक्ष को पाने के लिये है ! माया मोह इच्छा वासना तृष्णा अहंकार हमेशा घात लगाये बैठे रहते है , कब नजर हटी की वो अन्दर होते है और जीवन से धर्म को हटाकर अधर्म विकृती का अधिकार लाते है ! 

जीस प्रकार से चुहे , मुस घर के दिवालो मे छेद कर मकान कमजोर करते है वैसे अधर्म माया मोह अहंकार मन में भटकाव पैदा कर विचलित करते है सावधान रहो वैदिक ब्राह्मणधर्म के चुहोंसे सावधान रहो अपने मुलभारतिय हिन्दूधर्म का जागृती से पालन करो ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ 
कल्याण, अखण्ड हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Daulat Purnima : Margshirsh Purnima 4 December, 2025

#दौलत_पूर्णीमा  :  #मार्गषिर्श_पूर्णीमा ! 

#दौलत_पूर्णीमा  मार्गशीर्श  पूर्णीमा  इस  साल  4 दिसम्बर ,  2025 को  आ  रही  है  !  यह  समृद्धी  , धनधान्य , दौलत अर्थात  शृष्टी  की पूर्णीमा  है  ! 

इस  #दौलत_पूर्णीमा  पर  उपवास  का  विशेष महत्व  है  , गुरू  पुजन और  धर्म  दान  से  इस  अवसर  विशेष  है और  पुन्य  का  काम  माना  जाता  है  ! 

नये  व्यवसाय  , गृह  प्रवेश  आदी  उत्तम  होते  है  और  #आनन्द_चौका_पूजा  , #बीजक_पाठ  का  आयोजन  कर  घर  प्रसन्न  ता  से  भर  उठता  है  ! 

उपवास उपरांत  मिष्ठान्न  और  #नरियाल_फल  का  प्रसाद  बाटना  ऊचित  होता  है  !

#जय_गुरूदेव_कबीर  ! 

#दौलतराम

Wednesday, 3 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 1

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि  : 1 : 1

बेलि  : 1 : 1

हंसा  सरवर  शरीर  में  , हो  रमैया  राम  ! 

शब्द  अर्थ  : 

हंसा  = चेतन तत्व  राम  ! सरवर  =  विश्व  , जग  , शृष्टी  ! शरीर  = मानव  शारीर  ! हो  रमैया राम  = हे  जगत  चालक  मालक राम  ! 

प्रग्या  बोध  : 

परमात्मा कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  बताते  है की हंस  स्वरूप  निराकार  निर्गुण  अमर  अजर सर्वव्यापी  सार्वभौम चालक  मालक  केवल  एक  है  और  वो  है  चेतन  तत्व राम ! वो  सब  में  है  और हम  सब उसमे  है  पर  तब  भी  वो  हम  सब  से  अलग  , शृष्टी  से  बाहर  निराकार  निर्गुण  अवस्था  निर्वाण  या  मोक्ष  स्थित  है  और  सदा सत्य  न्यायी  है  ! मानव  शरीर  बडा  दूर्लभ  है  और  इसी  मानव  जीवन  मे  धर्म  का  प्रग्या  बोध मानव  को  सकता  है  और  उसका  धर्म  मार्ग  शिल  सदाचार  का  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  है  जो  कबीर  साहेब  उनकी  पवित्र  वाणी  बीजक  मे  हमे  बताते  है  !  कबीर  साहेब  कहते  है  भाईयों  अधर्म  अग्यान  छोडो  उस  परमतत्व  चेतान  राम  के  दर्शन के  कार्य  में  लग  जावो  वही  मानव  का  अंतिम  पडाव  है  ! 

धर्मविक्रमादित्य  कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय  हिन्दुधर्म विश्वपीठ 
कल्याण,  अखण्ड  हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Tuesday, 2 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Chaachar : 2 : 28

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : चाचर  : 2 : 28 

चाचर  : 2 : 28

तुम  छाड़हु  हरि  की  सेव  , समुझि  मन  बौरा  हो  !

शब्द  अर्थ  : 

तुम  = हे  मानव  ! छाड़हु  = छोड  दिया  ! हरि  = परमात्मा  चेतन  राम !  की  = उसकी  ! सेव  = संगत  ,साथ  , छाव  ! मन  बौरा  हो  = मन  पगला गया  है  , भटक रहा  है  ! 

प्रग्या  बोध ; 

परमात्मा कबीर  चाचर  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  तुम  अगर  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  के  शिल  सदाचार भाईचारा  समता  ममता  विश्वबंधुत्व एकेश्वर तत्व  विचार  का  पाला नही  करते हो ,  न  निर्गुन  निराकार  चेतन  तत्व  अहंकार  माया  मोह  तृष्णा  हरने  वाले  परम  न्यायी  और  दयालू चेतन  राम  को  मानते  हो  तो  समझो  तुम  गलत संगत मे  हो !  तुम्हारा मन  भटक  गया  है !   तुम्हारे  मन  पर  माया  मोह  तृष्णा  वासना  का  कब्जा  हो  गया  है !   तुम  अधर्म  को  धर्म  मान बैठे  हो !   विकृती  को  संस्कृती  मान बैठे  हो  और  स्पस्ट  है  तुम  अधर्मी कुधर्मी   विदेशी  वैदिक  ब्राह्मणधर्म  के  चंगुल  मे  फस  गये हो  !  भाईयों  उस से  बाहर  निकालो  अपने  मुलभारतिय  हिन्दूधर्म  के  सुसंगत  मे  आवो  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय  हिन्दूधर्म विश्वपीठ  , 
कल्याण , अखण्ड  हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

Monday, 1 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Chaachar : 2 : 27

पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : चाचर : 2 : 27

चाचर : 2 : 27

कहहिं कबीर जग भर्मिया , मन बौरा हो ! 

शब्द अर्थ : 

कहहिं कबीर = कबीर कहते है ! जग भर्मिया = जग को भ्रम मानने वाले ! मन बौरा हो = मन पगलाया है ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर चाचर के इस पद में कहते है भाईयों कुछ लोग इस संसार को , जग को , शृष्टी को असत्य और भ्रम , कल्पना कहते है पर यह शृष्टी वास्तविक है ! सत्य है ! कोई भ्रम या कल्पना नही ! राम सत्य है और राम -:मय यह शृष्टी भी सत्य है ! यह सत्य है की एक राम राजा हुवे जो मौर्य कुल नाग वंशी थे , दुसरे राम हम सब में है , तिसरे राम यह शृष्टी जग है ज़िसमे हम सब है और चवथे राम इन सब से परे ज़हाँ कबीर स्थित है ! उस स्थान की अवस्था वही समज सकता है जो शिल सदाचार का मुलभारतिय हिन्दूधर्म का समग्र पालन करता है ! वह अवस्था मोक्ष की अवस्था विशुद्ध चेतन राम की अवस्था है ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ , 
कल्याण अखण्ड हिन्दुस्तान शिवशृष्टी