Thursday, 11 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 9

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध :  बेलि  : 1 :  9

बेलि  : 1 : 9

त्रास  मथन  दधि  मथन  कियो , हो  रमैया  राम  ! 

शब्द  अर्थ  : 

त्रास  = परिश्रम   ! मथन  = मंथन  ! दधि   = दही  मथन = दही  को  घूसल  कर  माखन  से  घी  बनाना !  हो रमैया राम = हे  राममय साधु  संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा  कबीर  बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है भाईयों  बहुत  परिश्रम  से  और  विचार  मंथन  से  ही  सफलता  प्राप्त  होती  है  जैसे  दुध  को  बडे  सावधानी  से  गर्म  कर  जमाकर  इंतजार  कर   दही जमाई  जाती  है  और  फिर  उसे  मटके मे  ड़ाल  कर  मेहनत  से  मध  कर  माखन  निकाला जाता  है  और  फिर  उसे  गर्म  कर  घी  बनाई  जाती  है  वैसे ही  इस  जीवन को  समझो  यहाँ  भी  बडे  जतन  और  परिश्रम  से  सत्य  धर्म  के  मथनी  से  मथना पडता   है  तब  कही  राम  मिलता  है निर्वांण  मोक्ष  मिलता  है  !

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती  
मुलभारतिय हिन्दूधर्म विश्वपीठ , 
कल्याण, अखण्ड  हिन्दुस्तान,  शिवशृष्टी

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