पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि : 1 : 22
बेलि : 1 : 22
नौ बहियाँ दश गोनि , हो रमैया राम !
शब्द अर्थ :
नौ बहियाँ = नव नाडिया ! दश गोनि = दश दिशा ! हो रमैया राम = हे राममय साधु संतो !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है भाईयों यह शरीर नव नाडी से पुरे शरीर में चेतना का संचार करता है उसिके चलते पांच इन्द्रिय दशो दिशा से ग्यान हासिल करता है और ग्यान को क्या अच्छा है क्या बुरा है इस का निर्धारण धर्म से होता है इस लिये पाप धर्म यानी अधर्म विकृती और पुन्यधर्म यानी सदधर्म संस्कृती को समझ लो ! विदेशी यूरेशियन वैदिक ब्राह्मणधर्म अधर्म पापधर्म विकृती है तो मुलभारतिय हिन्दूधर्म पुन्यधर्म सदधर्म संस्कृती है ! विदेशी वैदिक ब्राह्मणधर्म विषमतावादी और तुम्हारा शोषण करता है तो मुलभारतिय हिन्दुधर्म समतावादी कल्याणकारी है ! दोनो धर्म अलग अलग है !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान ,