पवित्र बीजक : प्रग्या बोध : बेलि : 1 : 21
बेलि : 1 : 21
पाँच लदनुवाँ लादि चले , हो रमैया राम !
शब्द अर्थ :
पाँच = पंच इन्द्रिय ! लदनुवाँ = ग्रहण करने वाले , लेने वाले ! लादि चले = लेते चले ! हो रमैया राम = हे रममय साधु संतो !
प्रग्या बोध :
परमात्मा कबीर बेलि के इस पद में कहते है भाईयों शरीर पाँच इन्द्रिय लगातार नये नये इच्छा मोह वासना कामना लालच तृष्णा चाहत अहंकार घमंड आदी के संपर्क मे आते है और उससे बाधित होते रहते है ! वही लोग इनके काम को परख कर लेते है जो मुलभारतिय हिन्दूधर्म के शिल सदाचार भाईचारा समता ममता विश्वबंधुत्व के धर्ममार्ग पर चलकर इन पाँच भटकने वाले इन्द्रिय पर अंकुश रख कर धर्म अधर्म संस्कृती विकृती की पहचान कर पाते है ! वही इनके दूर्गुणो से बच कर सुखी रहते है !
धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस
दौलतराम
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती
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