Saturday, 13 December 2025

Pavitra Bijak : Pragya Bodh : Beli : 1 : 11

पवित्र बीजक :  प्रग्या बोध :  बेलि : 1 : 11

बेलि  : 1 : 11

फिरिके  हंसा पाहुन  भयो , हो  रमैया राम ! 

शब्द  अर्थ  : 

फिरिके  = घुम  फिरकर  , जन्म  मृत्यू  के  फेरे  में , बार  बार  का  भव  चक्र !  हंसा  = मानव  ! पाहुन  = मेहमान  ! भयो  = हुवा  ! हो  रमैया  राम  = हे  राममय  साधु  संतो  ! 

प्रग्या बोध : 

परमात्मा कबीर बेलि  के  इस  पद  में  कहते  है  मानव  जन्म  दूर्लभ  है  अनेक  प्रकार  के  योनी  जन्म  के  बाद  मानव  योनी  से  मानव  जन्म  होता  है  इस  के  लिये  न  जाने  कितने  जन्म  मृत्यू  के  फेरे से  गुजरना  होता  है !  अनेक  सुख  दुख  के  भव  चक्र  से  गुजरना  होता  है  यह  कोई  मामुली  प्रवास  नही  यहाँ  मानव  जन्म  के  अलावा  किसी  अन्य  जन्म  मे  धर्म  अधर्म , पाप  पुन्य  , सदकर्म  दुषकर्म  का  ग्यान  नही  होता  ! प्रग्या  बोध  केवल मानव  जन्म  में  ही  संभव  है  अन्य  जन्म  में  नही  तब   भी  हम  दूर्लभ  मानव  जन्म  लेते  है  तो  मोह  माया  इच्छा  तृष्णा  के  बहकावे  में  आकर  अधर्म  करते  है  और  अधर्म  के  फल  के  कारण  फिर  जन्म मृत्यू  के  फेरे  में  फस  जाते  है  मानवो  ने भी अनेक  अधर्म  अपने   थोडे  फायदे  के  लिये  निर्मांण  किये  है  जैसे  विदेशी  यूरेशियन  वैदिक ब्राह्मणधर्म जो  पुरा  झूठ  और  विकृती  का पुलिन्दा  है  ! इन  सब  से  बच  कर  मानव  को  मोक्ष  निर्वाण  चेतान  राम  की  कबीर  अवस्था  पाना  मानव  का  जन्म  का  लक्ष  है  जो  इस  लक्ष  को  भूल  जाता  है  और  अधर्म  विकृती  के  मार्ग  पर  चलता  है  उसे  बार  बार  जन्म  मृत्यू  के  भव  चक्र  के  फेरे  में  फस  कर  अनेक  कस्ट  दुख  झेलने  पडते  है  ! मानव  जन्म  यह  मेहमान  इस  बात  को  समझे  तो  जीवन  सार्थक  हो  ! 

धर्मविक्रमादित्य कबीरसत्व परमहंस 
दौलतराम 
जगतगुरू नरसिंह मुलभारती 
मुलभारतिय हिन्दुधर्म विश्वपीठ प्रतिष्ठान 
कल्याण , अखण्ड  हिन्दुस्तान , शिवशृष्टी

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